Ncert class 6 geography chapter 2 in hindi | ग्लोब, अक्षांश एवं देशांतर

Dear students, this is short note of ncert book. पिछले अध्याय (chapter 1) में हमलोग ज्योग्राफी का विषय प्रवेश किया था और यह भी जाना था कि पृथ्वी गोलाकार नहीं है। यह उत्तर एवं दक्षिण ध्रुव पर थोड़ी चपटी तथा मध्य में थोड़ी उभरी हुई है। आज इस अध्याय में हमलोग ncert class 6 geography chapter 2 पढ़ेंगे जिसमें ग्लोब, अक्षांश एवं देशांतर के बारे में जानेंगे।

ncert class 6 geography chapter 2 (ग्लोब, अक्षांश एवं देशांतर)

ncert के अनुसार अब हमें जो टॉपिक पढ़ना है वह निम्नलिखित है :-

1.अक्षांश रेखाएं
2. पृथ्वी के ताप कटिबंध
3. देशांतर क्याा है?
4. देशांतर और समय
5. हम मानक समय क्यों मानते हैं?

हम सबसे पहले समझते हैं कि ग्लोब क्या है? फिर हम आगे बढ़ेंगे। ग्लोब पृथ्वी का एक नमूना है। पृथ्वी के समान किसी गोले पर किसी बिंदु की स्थिति का वर्णन करना कठिन है। अब प्रश्न यह उठता है कि इस पर किसी स्थान की स्थिति कैसे बताई जा सकती है? इसके लिए हमें कुछ बिंदुओं एवं रेखाओं की मदद लेनी होती है। इन रेखाओं और बिंदुओं के मदद से महाद्वीपों तथा महासागरों को उनके सही आकार में दिखाया जाता है।

आप देखेंगे कि एक सुई ग्लोब में झुकी हुई अवस्था में स्थित होती है, जिसे अक्ष कहा जाता है। ग्लोब पर वे 2 बिंदु जिनसे होकर सुई गुजरती है उत्तर तथा दक्षिणी ध्रुव है। ग्लोब को इस सुई के चारों ओर पृथ्वी की भांति पश्चिम से पूरब की ओर घुमाया जा सकता है। लेकिन ग्लोब में जो सुई बनाया गया है वैसा पृथ्वी में नही है पृथ्वी में एक काल्पनिक रेखा माना गया है जिसके चारोंं ओर पृथ्वी घूमती है।

एक अन्य काल्पनिक रेखा भी ग्लोब को दो बराबर भागों में बांटती है। इसे विषुवत वृत्त कहा जाता है। विषुवत रेखा एक काल्पनिक रेखा है जो पृथ्वी के मध्य से पश्चिम से पूरब की ओर खींची गई है तथा पृथ्वी को दो बराबर भागों में विभाजित करती है। इसके उत्तरी भाग को उत्तरी गोलार्ध तथा दक्षिणी भाग को दक्षिणी गोलार्ध कहते हैं।

अक्षांश रेखाएं

विषुवत वृत्त से ध्रुव तक स्थित सभी समांतर वृतों को अक्षांश (समांतर) रेखाएं कहा जाता है।अक्षांशों को अंत में मापा जाता है।

विषुवत वृत्त शून्य अंश अक्षांश को दर्शाती है। चूँकी, विषुवत वृत्त से दोनों तरफ ध्रुवों के बीच की दूरी पृथ्वी के चारों ओर के वृत्त का एक चौथाई है, अतः इसका माप होगा 360 अंश का 1/4, यानी 90 अंश। इस प्रकार 90 अंश उत्तरी अक्षांश उत्तर ध्रुव को दर्शाता है तथा 90 अंश दक्षिणी अक्षांश दक्षिणी ध्रुव को।

इस प्रकार विषुवत वृत्त के उत्तर की सभी समांतर रेखाओं को उत्तरी अक्षांश कहा जाता है तथा विषुवत वृत्त के दक्षिण में स्थित सभी समांतर रेखाओं को दक्षिणी अक्षांश कहा जाता है।

विषुवत वृत्त (0°), उत्तर ध्रुव (90° उत्तर) तथा दक्षिण ध्रुव (90° दक्षिण) के अतिरिक्त 4 और महत्वपूर्ण अक्षांश ( समांतर ) रेखाएं निम्नलिखित हैं –

1. उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा 23°30′ उ.
2. दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा 23°30′ दक्षिण
3. विषुवत वृत्तत के 66°30′ उत्तर में उत्तर ध्रुव वृत
4. विषुवत रेखा के 66°30′ दक्षिण में दक्षिणी ध्रुव वृत

पृथ्वी के ताप कटिबंध

कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के सभी अक्षांशों पर सूर्य वर्ष में एक बार दोपहर में सिर के ठीक ऊपर होता है इसलिए इस क्षेत्र में सबसे अधिक ऊष्मा प्राप्त होती है तथा इसे उष्ण कटिबंध कहा जाता है।

कर्क एवं मकर रेखा के बाद किसी भी अक्षांश पर दोपहर का सूर्य कभी भी सिर के ऊपर नहीं होता है। ध्रुव की तरफ सूर्य की किरणें तिरछी होती जाती है। इस प्रकार, उत्तरी गोलार्ध में कर्क रेखा एवं उत्तर ध्रुव वृत्त तथा दक्षिणी गोलार्ध में मकर रेखा एवं दक्षिणी ध्रुव वृत के बीच वाले क्षेत्र का तापमान मध्यम रहता है। इसलिए इन्हें, शीतोष्ण कटिबंध कहा जाता है।

उत्तरी गोलार्ध में उत्तर ध्रुव वृत एवं उत्तरी ध्रुव तथा दक्षिणी गोलार्ध में दक्षिणी ध्रुव वृत एवं दक्षिणी ध्रुव के बीच के क्षेत्र में ठंड बहुत होती है। क्योंकि, यहां सूर्य क्षितिज से ज्यादा ऊपर नहीं आ पाता है। इसीलिए यह शीत कटिबंध कहलाते हैं।

देशांतर क्या है?

किसी स्थान की स्थिति को बताने के लिए उस स्थान के अक्षांश के अतिरिक्त कुछ और जानकारियों की आवश्यकता भी होती है। प्रशांत महासागर में स्थित टोंगा द्वीप एवं हिंद महासागर में स्थित मॉरीशस द्वीप एक ही अक्षांश (20°00’द.) पर स्थित है। उनकी सही स्थिति जानने के लिए यह पता करना होगा कि उत्तर ध्रुव को दक्षिणी ध्रुव से जोड़ने वाली संदर्भ रेखा से पूर्व या पश्चिम की ओर इन स्थानों की दूरी कितना है? इन संदर्भ रेखाओं को देशांतरीय याम्योत्तर कहते हैं। तथा उनके बीच की दूरी को देशांतर के अंशों में मापा जाता है।

देशांतर और समय

समय को मापने का सबसे अच्छा साधन पृथ्वी, चंद्रमा एवं ग्रहों की गति है। सूर्योदय एवं सूर्यास्त प्रतिदिन होता है। अतः स्वाभाविक ही है कि यह पूरे विश्व में समय निर्धारण का सबसे अच्छा साधन है। स्थानीय समय का अनुमान सूर्य के द्वारा बनने वाली परछाई से लगाया जा सकता है। जो दोपहर में सबसे छोटी एवं सूर्योदय तथा सूर्यास्त के समय सबसे लंबी होती है।

ग्रीनविच पर स्थित प्रमुख याम्योत्तर पर सूर्य जिस समय आकाश के सबसे ऊंचे बिंदु पर होगा, उस समय याम्योत्तर पर स्थित सभी स्थानों पर दोपहर होगी। क्योंकि, पृथ्वी पश्चिम से पूरब की ओर चक्कर लगाती है। अतः वह स्थान जो ग्रीनविच के पूर्व में है, उनका समय ग्रीनविच समय से आगे होगा तथा जो पश्चिम में है, उनका समय पीछे होगा।

कोई भी स्थान जो ग्रीनविच से 180° पश्चिम में स्थित है, उसका समय ग्रीनविच लंदन के समय से 12 घंटे पीछे होगा और कोई स्थान जो 0° से 180° पूर्व में है उसका समय 12 घंटे आगे होगा।

हम मानक समय क्यों मानते हैं?

अलग-अलग याम्योत्तर पर स्थिति स्थानों के स्थानीय समय में अंतर होता है। उदाहरण के लिए, बहुत से देशांतरों से होकर गुजरने वाली रेलगाड़ियों के लिए समय सारणी तैयार करना कठिन होगा। भारत में गुजरात के द्वारका तथा असम के डिब्रूगढ़ के स्थानीय समय में लगभग एक घंटा 45 मिनट का अंतर होगा। इसलिए यह आवश्यक है कि देश के मध्य भाग से होकर गुजरने वाली किसी याम्योत्तर के स्थानीय समय को देश का मानक समय माना जाए। इस याम्योत्तर रेखा के स्थानीय समय को पूरे देश का मानक समय माना जाता है। भारत में 82°30′ पू. को मानक याम्योत्तर माना गया है। इस याम्योत्तर के स्थानीय समय को पूरे देश का मानक समय माना जाता है। इसे भारतीय मानक समय के नाम से जाना जाता है।

तो दोस्तो हमने ncert class 6 geography chapter 2 भी संक्षेप में पढ़ लिया। हमे उम्मीद है यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो।

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