NCERT Class 6 geography chapter 1 in hindi | सौरमंडल में पृथ्वी

सौर्यमण्डल
ncert class 6 geography सौर्यमण्डल

दोस्तों यह पोस्ट NCERT Class 6 geography chapter 1 का short note है। इस पोस्ट में हम एनसीईआरटी के बुक में जितने भी महत्वपूर्ण टॉपिक है उसी के बारे में अध्ययन करेंगे। यह पोस्ट सभी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए उपयोगी है। हमें पूर्ण विश्वास है कि यह नोट आपके लिए उपयोगी साबित होगा और यकीन माने यह अध्याय 1 में ncert में बस इतना ही टॉपिक को को पढ़ना है जितना इस पोस्ट में डाला गया है। आप खुद से भी देख सकते है।

NCERT Class 6 geography chapter 1 ( सौरमंडल में पृथ्वी )

इस अध्याय में जो टॉपिक हमें पढ़ना है वह इस प्रकार है-

1. सौर मंडल
2. सूर्य
3. ग्रह
4. पृथ्वी
5. चद्रमा
6. छुद्र ग्रह
7. उल्कापिंड
Ncert class 6 geography chapter 1

सूर्य, चंद्रमा तथा वे सभी वस्तु जो रात के समय आसमान में चमकती है खगोलीय पिंड कहलाती है। कुछ खगोलीय पिंड बड़े आकार वाले तथा गर्म होते हैं। यह गैसों के बने होते हैं इनके पास अपनी ऊष्मा तथा प्रकाश होता है, जिसे वे बहुत बड़ी मात्रा में उत्सर्जित करते हैं। इन खगोलीय पिंड को तारा कहते हैं।

तारों के विभिन्न समूहों के द्वारा बनाई गई विविध आकृतियों को नक्षत्र मंडल कहते हैं। अर्सा मेजर या बिग बियर इसी प्रकार का एक नक्षत्र मंडल है। सप्त ऋषि जो कि एक नक्षत्र मंडल है, यह अर्सा मेजर का ही एक भाग है।

प्राचीन समय में, लोग रात्रि में दिशा का निर्धारण तारों की सहायता से करते थे। उत्तरी तारा उत्तर दिशा को बताता है। इसे ध्रुवतारा भी कहा जाता है।

कुछ खगोलीय पिंडों में अपना प्रकाश उस्मा नहीं होती है। वे तारों के प्रकाश से प्रकाशित होते हैं, ऐसे पिंड ग्रह (planet) कहलाते हैं। ग्रह (planet) ग्रीक भाषा के प्लेनेटाई (planetai) शब्द से बना है जिसका अर्थ होता है परिभ्रमक अर्थात चारों ओर घूमने वाले। नीचे बॉक्स में ग्रहों को अपने अक्ष पर और सूर्य के चारों ओर एक चक्कर लगाने में कितना समय लगता है वह दर्शाया गया है अतः निम्नलिखित डाटा को याद रखें।

ग्रह अपने अक्ष पर घूर्णन सूर्य के चारों ओर एक परिक्रमा
बुध 59 दिन 88 दिन
शुक्र 243 दिन 255 दिन
पृथ्वी एक दिन 365 दिन
मंगल एक दिन 687 दिन
बृहस्पति 9 घंटे 56 मिनट 11 साल 11 महीने
सनी 10 घंटे 40 मिनट 29 साल 5 महीने
यूरेनस 17 घंटे 14 मिनट 84 साल
नेपच्यून 16 घंटे 7 मिनट 164 साल

1. सौर्यमंडल

सूर्य, आठ ग्रह, उपग्रह तथा कुछ अन्य खगोलीय पिंड जैसे छुद्र ग्रह एवं उल्कापिंड मिलकर सौर्य मंडल का निर्माण करते हैं। उसे हम सौर परिवार का नाम देते हैं जिसका मुखिया सूर्य है।

2. सूर्य

सूर्य पृथ्वी से लगभग 15 किलोमीटर दूर है। यह सौर्य मंडल के केंद्र में स्थित है। सूर्य सौरमंडल के लिए प्रकाश एवं ऊष्मा का एकमात्र स्रोत है। सूर्य की परत पर कुछ धब्बे उत्पन्न होते हैं जिन्हें सूर्य कलंक कहते हैं। प्रत्येक सूर्य कलंक के मध्य भाग को प्रच्छाया (umbra) कहते हैं और प्रकाशित भाग को उपछाया (penumra) कहते हैं।

3. ग्रह

हमारे सौरमंडल में आठ ग्रह सूर्य से दूरी के अनुसार विक्रम सर इस प्रकार है- बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, यूरेनस तथा नेपच्यून। सभी ग्रह एक निश्चित दीर्घवृताकार पथ पर सूर्य का चक्कर लगाते हैं, यह पथ ही कक्षा कहलाते हैं। ग्रहों को दो वर्गों में विभाजित किया जाता है : 1. आंतरिक ग्रह (बुध, शुक्र, पृथ्वी तथा मंगल) 2. बाह्य ग्रह ( बृहस्पति, शनि, अरुण तथा वरुण)

Planet
ग्रहो की स्थिति

4. पृथ्वी

सूर्य से दूरी के हिसाब से पृथ्वी तीसरा और यह आकार में पांचवा सबसे बड़ा ग्रह है। जीवन के लिए अनुकूल परिस्थितियां संभवतः केवल पृथ्वी पर ही पाई जाती है। अंतरिक्ष से देखने पर पृथ्वी नीले रंग की दिखाई पड़ती है क्योंकि इसकी दो तिहाई सतह पानी से ढकी हुई है इसलिए इसे नीला ग्रह भी कहा जाता है। पृथ्वी के धरातल पर चार मंडल पाए जाते हैं :- वायुमंडल, जलमंडल, स्थलमंडल तथा जीवमंडल। दोस्तो पृथ्वी के बारे एक अलग से पोस्ट हम आपके लिए लिख सकते है अगर आप हमारे कमेंट करें तो।

5. चन्द्रमा

हमारे पृथ्वी के पास केवल एक ही उपग्रह है चंद्रमा इसका व्यास पृथ्वी के व्यास का केवल एक चौथाई है चंद्रमा पृथ्वी से लगभग 3,84,400 किलोमीटर दूर है। यह पृथ्वी का एक चक्कर 27 दिन में पूरा करता है और लगभग इतने ही समय में यह अपने अक्ष पर भी एक चक्कर पूरा करता है। इसका ब्यास 3470 किलोमीटर है। 1 महीने के अलग-अलग दिनों में चंद्रमा की आकृति भी भिन्न-भिन्न दिखाई देती है, इसका मुख्य कारण चंद्रमा तथा पृथ्वी का पारस्परिक बदलता स्थान है। चंद्रमा के इन बदलते स्वरूप को चंद्रकलाएं कहते हैं।

6. छुद्र ग्रह

तारों, ग्रहों एवं उपग्रहों के अतिरिक्त असंख्य छोटे पिंड भी सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। इन पिंडो को छुद्र ग्रह कहते हैं। यह मंगल एवं बृहस्पति की कक्षाओं में पाए जाते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार छुद्र ग्रह, ग्रह के ही भाग होते हैं। जो कि बहुत वर्ष पहले विस्फोट के बाद ग्रहों से टूट कर अलग हो गए।

7. उल्का पिंड

सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाने वाले पत्थरों के छोटे-छोटे टुकड़े को उल्कापिंड खाते हैं। कभी-कभी यह उल्कापिंड पृथ्वी इतने नजदीक आ जाते हैं कि इन की प्रवृत्ति पृथ्वी पर गिरने की होती है। खुले आकाश में एक ओर से दूसरी ओर लाखों तारों के समूह के द्वारा एक ओर से दूसरी ओर तक फैली चौड़ी सफेद पट्टी की तरह बनाए गए चमकदार रास्ते को आकाशगंगा या मिल्की वे कहते हैं।

तो दोस्तो हमने आपको ncert class 6 geography chapter 1 का विषय प्रवेश कराया मुझे विश्वास है कि यह संक्षिप्त पोस्ट आपको पसंद आया हो। यदि आप ऐसे ही हमारे पोस्ट पढ़ना चाहते है तो नीचे दिए हमारे टेलीग्राम ग्रुप को जरूर जॉइन करे जिससे कि कोई भी पोस्ट आपसे न छूटे।

निम्नलिखित प्रश्नों का उत्तर दीजिए-

  1. किस ग्रह को पृथ्वी के जुड़वां ग्रह के नाम से जाना जाता है?

2. सूर्य से तीसरा सबसे नजदीक ग्रह कौन सा है?

3. सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर किस प्रकार के पथ पर चक्कर लगाते हैं?

4. ध्रुव तारे से किस दिशा का ज्ञान होता है?

5. छुद्र ग्रह किन कक्षाओं के बीच पाए जाते हैं?

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